जाने कहाँ गए वो दिन
मेरी कविताओं का संग्रह ©
Friday, 29 June 2012
रौनक-ए-रुखसार
हम तो उनके चेहरे से
उनके दिल का हाल जान लेते थे
उनकी हर मुस्कराहट को
अपना मान लेते थे
अब जाकर बताया उन्होंने
वो मुस्कराहट नहीं खुमारी थी
और
वो रौनक-ए-रुखसार
इश्क़ की बीमारी थी
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