Sunday, 21 September 2025

शायद किसी दिन तुम लौट आओगे


जिस दिन M.Sc. का रिज़ल्ट आया—

वही दिन था जब तुम सबसे ज़्यादा याद आए।

रिज़ल्ट का पन्ना खुला,
और मेरी सांसें सिकुड़ गईं।
दिल बिना आवाज़ के रोया—
ऐसे रोया कि खुद से भी डर लगने लगा।

मन में बेचैनी का एक घर बना रहा,
हर क़दम पर तुम्हारी परछाई मिली।
ऐसा लगा — तुम आओगे,
और मेरे जाने की वजहें छीन लोगे 
इंतज़ार की घड़ियाँ बीतती रहीं 
पर तुम नहीं आए 

डिपार्टमेंट में सब बधाई देते रहे,
मेरी मुस्कान झूठी, मन उदास।
बाहर निकली— बॉटनी डिपार्टमेंट के पास रुक गई,

फिर से हाथ में रिज़ल्ट पकड़े तुम्हें दिखाने की तमन्ना हुई।
तुम्हारा रिज़ल्ट देखना चाह रही थी 
पर यह पहली बार था—
हमने अपने-अपने रिजल्ट एक-दूसरे को नहीं दिखा पाए 

मैं तुम्हारे क्लासरूम में गई,
वहाँ मिली सिर्फ़ तुम्हारी गूँज।
आँखों से आँसू बह निकले —
शब्द छोटे पड़ गए, सब कुछ अधूरा रह गया।

पीछे के गार्डन में जाकर बैठी,
न कोई खत था, न कोई ख़बर थी ।
मैं बहुत रोई —
ऐसे रोई जैसे शाम ने आसमाँन से अपना हाथ छीन लिया हो।
अब भी पुकारती हूँ—
“प्रशान्त, कहां हो?”
मेरी आवाज़ हवा में खो गई,
पर मेरा दिल हर बार उसी दरवाज़े पर ठहर गया।

मैंने कहा—
प्लीज़ मेरा रिज़ल्ट देखो,
और अपना रिज़ल्ट मुझे दिखाओ।
अगर मुझसे कोई भूल हुई है तो बताओ—
ऐसी सज़ा मत दो।
क्योंकि तुम आते तो सब आसान हो जाता—
मुस्कराहट लौट आती, सांसें मिल जातीं।

तुम न आए—
तुम्हें आने की आदत थी पर तुम न आये।
कैसे छोड़ दिया तुमने मुझे मरने के लिए—
यह सवाल रोज़ काटों की तरह चुभता है।
मैं घर कैसे पहुँची—याद है अभी भी—
दरवाज़ा खोला, पर भीतर सब सुनसान था।

किसी से तुम्हारा रिज़ल्ट न पूछा—
क्योंकि हर सवाल में तुम्हारी ख़ुशी छिपी थी।
विश्वास से अब नफ़रत होने लगी—
वह शब्द टूट कर काँच बन गया था।
तुमने यह भी नहीं सोचा—
कि मैं कितनी जल्दी घबरा जाती हूँ,
कि मेरा रहना भी तुम्हारे साथ था जुड़ा हुआ।

जीना मुश्किल था,
हर सुबह एक परीक्षा सी लगती थी।
सबका बदला मुझ पर चलाया गया—
और मैं उस सजा को चुपचाप सहती रही।
ज़िन्दगी का वह वक्त—
हवा चली तो घर हिल गया,
छोटी-छोटी चीज़ें बड़ी बन गईं।

पर यादें भी थीं—
बॉटनी डिपार्टमेंट की खुशबू में तुम्हारे हँसने की गूंज,
क्लासरूम की कुर्सियों पर तुम्हारी आवाज़।
यादें ऐसी रोशनी हैं—
जो दिल में जले पर बाहर न दिखें।

मैं ने सीखा—
आंसू भी शब्द बनते हैं,
और चोटें फूलों की तरह खामोशी में खिलती हैं।
तुम्हारे बिना भी मैंने जाना—
कि एक मुस्कान वापस बना लेने में वक्त लगता है।

फिर भी—
हर रिज़ल्ट के पन्ने पर तुम्हारा नाम ढूँढती हूँ,
हर पेड़ से तुम्हारी परछाई पूछती हूँ।
कहीं दरवाज़ा खुला न लगे—
कहीं तुम लौट आओ और चुपके से सब कुछ समझा दोगे।

प्रशान्त, अगर तुम सुनते हो—
वही भावनाएं अभी भी तुम्हें पुकारती है।
पर मैंने भी खुद से वादा किया है—
कि जो टूटा, उसे धीरे-धीरे जोड़ूंगी।
रिश्तों की किताबें कभी-कभी उल्टी खुलती हैं—
पर पन्ने पलटते हैं, और दिन बदलते हैं।

अगर तुम आओगे तो मैं सब कुछ सुन लूंगी—
और अगर न आओ तो मैं अपनी आवाज़ खुद से जोड़ लूंगी।
क्योंकि किसी की मौजूदगी ज़रूरी थी—
और मैंने सिख लिया—
कि साथ की गर्माहट ही नहीं,
अपनी ठंडी रातों को भी रोशन करना आना चाहिए।

रिज़ल्ट का वह पन्ना अब भी अछूता है—
पर अब मैं उसे अकेले पढ़ सकती हूँ।
और फिर भी—
हर शाम जब तुम्हारी ओर चलती हूँ,
एक उम्मीद की मूर्धा मेरे साथ चलती है—
शायद किसी दिन तुम लौट आओगे। 

Monday, 11 August 2025

सपना या हक़ीक़त

 कल तुम्हें देखने का बहुत दिल कर रहा था

तो रात में चुपके से तुम्हारे ख़्वाबों में चला आया,

तू सोती रही और मैं तुझे निहारता रहा

मैं तुझे यादों की गलियों में ले गया

जहां तुम थी ,मैं था और था

हमारा प्यार भरा सुकून।   

तुम्हारे चेहरे पर मुस्कुराहट थी।

तुमने मेरे हाथों को थाम रखा था। 

रात बीती

भोर की किरणों ने धरा पर फैलना शुरू किया 

मैंने तुम्हारी पलकों को चूमकर

तुम्हारे कानों में धीरे से सुप्रभात कहा

और तुम मुस्कुराते हुए उठी

अपनी स्वप्नों की दुनिया से।

तुम्हारी आँखें कुछ ढूंढ रही थीं 

शायद तुम सपने को

हकीक़त मान रही थी।

मैं समझ रहा था तुम क्या ढूंढ रही थी

मैं मन ही मन में फिर तुमसे मिलने का वादा कर लौट आया।


उस रात

 मेरी जान के नाम,


उस रात…

जब तेरी आँखें मेरी वजह से भीगी थीं,

मुझे कुछ समझ नहीं आया —

सिवाय इसके कि

मैं सबसे बड़ी गलती कर चुका हूँ।


तू चुप थी, पर तेरी खामोशी चीख रही थी।

और मैं... मैं उस खामोशी को सुन न पाया।


आज जब तू कहती है,

"जो मेरी गलती रही, खुद sorry बोल दूंगी" —

तो दिल और भी भारी हो जाता है।

क्योंकि गलती सिर्फ मेरी थी…

और उस "sorry" का हक़ भी नहीं।


मैं तुझसे कुछ माँगने की हालत में नहीं हूँ,

बस तुझसे ये कहना चाहता हूँ —

अब तेरी हँसी मेरी ज़िम्मेदारी है,

तेरी ख़ामोशी मेरी कसौटी,

और तेरे आँसू मेरी हार।


तेरी आँखें फिर कभी न भरें,

इसके लिए मैं हर रोज़ खुद को बदलूंगा।

बस तू...

बस तू अपना दिल थोड़ा सा खोल देना

मेरे लिए।


हमेशा तेरा,

वही जो तुझसे बेइंतहा मोहब्बत करता है।

That night

 To the love of my life,


That night…

when your eyes welled up because of me,

I didn’t just hurt you —

I shattered a part of myself too.


You were silent,

but your silence was screaming.

And I… I failed to listen.


Now when you say,

“If it was my fault, I’ll say sorry myself” —

it stings deeper.

Because the fault was mine,

and even your sorry feels like a wound I don't deserve.


I’m not in a place to ask for anything.

Just want you to know —

your smile is now my responsibility,

your silence my test,

and your tears… my biggest defeat.


I’ll change myself,

a little every day,

just to make sure your eyes never have to cry again.


So please…

open that heart of yours

just a little,

and let me earn my way back in.


Forever yours,

The one who loves you more than words ever could.

उसने कहा था

 उसने कहा था .... 

बोझिल पलकों में कई खूबसूरत 

ख़्वाब समेटे हुए

जब सपनों की दुनिया से निकले तुम 

मैं भी चुपके से तेरे साथ चली आई।

तुम्हे ये बताने की

खुशी से भरी ये सुबह 

तुम्हारे ख्वाबों से भी ज्यादा हसीन है।

तुम्हे एहसास दिलाने की

मैं तुम्हारे पास हूँ 

बहुत पास।

सुबह की हर किरण में मुझे महसूस करो

जो तुम्हें छू रही हैं

तुम्हारी हर सांस में मेरी खुशबू है

ये ठंडी हवाएं जो तुझसे लिपट रही हैं

वो मैं ही तो हूं।

हर पल तेरे साथ

कभी तुम्हें प्यार करती,

कभी तुमसे रूठती, 

कभी तुम्हें मनाती।

तुम मुझे इधर उधर ढूंढते 

और मैं तुम्हारी बाहों में छुपी होती 

ऐसे मैं तुम्हें नींद से जगाती

फ़िर मन ही मन में तुमसे विदा लेकर

अपनी दुनिया में लौट आती 

बेसब्री से इंतजार रहता

शाम ढलने का

चाँद के निकलने का

तुम आते

और हम

हाथों में हाथ डाले 

अपनी ख़्वाबों की दुनिया में 

लौट जाते।

Good Morning, My Sweetheart

 🌸 Good Morning, My Sweetheart 🌸


Wake up, my love…

The sun is shy behind the curtain,

Waiting for your sleepy smile

To light up the world again.


Your dreams still dance on your lashes,

But the day longs to hold your hand—

Let it be gentle, let it be kind,

As warm as my whispers in your mind.


May the breeze kiss your cheeks today,

May every wish you hold find its way.

I send you a sky full of blessings, my dear,

And a heart that beats only when you’re near.


So open your eyes, my morning star,

Your love is my light, no matter how far.

Rise, my sweetheart, and take the day—

It’s yours, in every loving way.


❤️ Good Morning, My Everything. ❤️

सुप्रभात मेरी धड़कन

 🌸 सुप्रभात मेरी रूह, मेरी जान 🌸


जागो मेरी जान…

सूरज भी परदे के पीछे ठहर गया है,

तेरी उनींदी मुस्कान का इंतज़ार है उसे,

तू ही तो है जो इस दुनिया को रोशन करती है।


तेरे ख्वाब अब भी तेरी पलकों पे झूम रहे हैं,

मगर ये दिन तुझसे बस एक मुस्कुराहट मांग रहा है।

चाहता है तेरा साथ…

तेरे हर क़दम में अपनी सारी नेमतें बिछा देना।


दुआ करता हूँ—

तेरे गालों को आज हवा प्यार से छुए,

तेरे दिल की हर आरज़ू पूरी हो जाए।

मैंने अपनी हर धड़कन में तुझको प्यार भेजा है,

तेरे साथ जो चलती है वो मेरी मोहब्बत की परछाईं है।


खोल अपनी आंखें मेरी सुबह की रौशनी,

तू ही मेरा उजाला है, तू ही मेरी जिंदगी।

उठो मेरी जान, और इस दिन को अपना बना लो—

क्योंकि ये दिन भी तुझसे ही शुरू होता है…


❤️ सुप्रभात मेरी धड़कन… आज भी मुझे तुझसे पहले से कहीं ज़्यादा मोहब्बत है ❤️

तुम सुकून हो

सुबह तुम्हारे ख्याल से नहीं,

तुमसे ही होती है।

अभी महसूस की है वो धड़कन,

जो तुम्हारा नाम लेकर

मेरे सीने में बजी है।


हवा तो बस बहती है,

मगर जब वो तुझसे होकर आती है,

तो उसमें तेरी महक,

तेरा एहसास लिपटा होता है।


तुम वो सुकून हो,

जो बेवजह नहीं आता —

तुम्हारे होने से ही

हर वजह हसीन लगती है।


तुम्हारी यादें

मेरे होंठों पर मुस्कुराहट बनकर खिलती हैं,

और तुम्हारा नाम —

मेरी हर सुबह की पहली दुआ बन गया है।


तुमसे मुलाक़ात नहीं,

हर सुबह इक नया इश्क़ होता है।

तुम्हारी बेचैनी

 मेरी रूह... मेरी हमनफ़स 

रात तुम्हारी बेचैनी ने मेरी नींद भी छीन ली,

सुबह बस तुम्हारे ख्याल से ही हुई।


हर बवंडर, हर सवाल…

मैंने अपनी धड़कनों से सुने हैं,

और अब उन्हें सुकून में बदलने आया हूँ।


हाँ…

तुमने मनाया है जान की तरह,

अब मैं तुम्हें अपनी रूह की तरह संवारूंगा।


तेरी मुस्कान… मेरी दुआ बन चुकी है,

और आज वो तुम्हें पूरी कर दिखाऊंगा।


तुम्हारी आंखों को पढ़ना मेरी रही है शुरू से,

जो जुबां नहीं कहती, वो रूह कह देती है।


तेरा बेइंतहा प्यार मेरी रगों में बहता है,

जो हर बार और गहरा होता चला जाता है।


तेरे बिना जीना कभी मुमकिन नहीं था,

मैं अपने हर लम्हे में तुझे ज़िंदा रखूंगा।


वादा है,

तेरी हर साँस के साथ मेरा प्यार भी चलेगा —

आख़िरी सांस तक।


शक तो था ही नहीं… कभी होगा भी नहीं

अब तेरे दिल को भी यही यक़ीन दिलाऊंगा।


और जो टूटा है,

उसे सिर्फ़ जोड़ूंगा नहीं,

अपनी बाहों में महफूज़ भी रखूंगा।


अब मुस्कुरा दो जान,

क्योंकि तुम्हारी मुस्कान में ही मेरी जान बसती है।

तू परेशान थी

 रात... तेरी बेचैनी से जागती रही,

सुबह... तेरी ख़ामोशी से बोलती रही।


तू परेशान थी...

और मेरा दिल टूटता रहा तेरे हर ख्याल पर।


हर सवाल तेरा...

मेरे सीने में जैसे दस्तक देता रहा।


तूने मनाया…

जान बन कर।

अब मैं निभाऊंगा…

रूह बन कर।


तेरी मुस्कान…

अब मेरा मक़सद है।

और हाँ,

उसे लौटाना मेरा वादा है।


तेरी आंखें जो न कह सकीं,

वो सब मैं सुन चुका हूँ।


प्यार तेरा…

बेहिसाब है,

और मेरा…

तेरे नाम की हर धड़कन।


तेरे बिना जीना?

अब सोचना भी मुमकिन नहीं।


मैं तुझे हर साँस में रखूंगा,

हर पल में छुपा लूंगा।


मुझे तुझ पर यकीन है,

और अब

तेरे दिल को भी वही सुकून दूंगा।


जो टूटा है,

उसे गले लगाकर जोड़ दूंगा —

हमेशा के लिए।


अब बस मुस्कुरा दे,

क्योंकि बस इक …

तेरे होने से मेरी दुनिया रोशन है।

हमारा रिश्ता

 हाँ… याद है मुझे वो सदियाँ,

जब वक़्त ठहर जाता था तुम्हारी एक मुस्कान पर,

जब दिन तुझसे शुरू होते थे

और रातें तेरे ख्वाबों में गुजरती थीं।


तेरे अल्फ़ाज़ नहीं,

तेरे एहसास बोलते थे —

तेरी खामोशी में भी

मेरे लिए मोहब्बत के अफसाने 

हर लम्हे में भरे थे।


हमारा रिश्ता कोई समझ न सका,

क्योंकि वो लफ़्ज़ों से नहीं,

रूहों से बना था।

हम वो दो लोग थे

जो वक़्त से नहीं,

अहसास से जुड़े थे।


तेरा लिखा हर खत

जैसे मेरी बेसुकूनी की दवा होती थी,

और मैं —

हर रात तुझे पढ़कर

नींद की बाँहों में खो जाता था।


फिर जाने क्या हुआ…

वही हम, वही दिल, वही रूह —

पर बीच में आ गई बस एक 'दूरी'।

ना झगड़ा, ना शिकायत,

बस ख़ामोशियाँ…

जो बढ़ती गईं — और दूरियाँ बनती गईं।

अब जब तेरा नाम सुनता हूँ,

तो सांसें चलती हैं,

पर दिल ठहर सा जाता है।


पर आज भी...

अगर तू चुपचाप किसी रात

मुझे पुकारे —

तो मैं वही पुरानी जगह पर मिलूंगा,

जहाँ तेरी हर बात बगैर कहे समझ लेता था।


क्योंकि मोहब्बत जब रूह से हो,

तो जुदाई सिर्फ़ जिस्मों की होती है।

रूहें… कभी जुदा नहीं होतीं।

My dearest love

As you take to the skies tomorrow,

know that a piece of my soul travels with you.

In every mile you drift away,

my heart will weave invisible threads

to keep you close—

threads spun of memories,

laughter shared in secret hours,

and the quiet magic of simply existing in your light.


The wind will carry my whispers to you,

the stars will guard my wishes for you,

and the moon will hold your name

till the night returns you to my dreams.


Go, my love,

and let the world see the grace I have cherished,

but remember—

no ocean, no border,

no ticking of clocks

can unwrite the story our hearts still recite

in the silent language only we understand.


Until we meet again,

I’ll live in the hope of that first look,

that first smile—

reborn in the moment you return.

तुम्हारा दर्द

तुम्हारे हर शब्द में

मैंने दर्द की गूंज सुनी है,

पर उस गूंज के पीछे

एक समंदर-सा साहस भी देखा है।  


तुम मिटती रहीं,

पर हर बार किसी और की रोशनी बनीं,

तुम टूटती रहीं,

पर किसी और का आकाश थामे रहीं।


तुम्हारी थकान में भी

दुआओं की महक है,

तुम्हारी चुप्पी में भी

प्रेम की गहराई है।


तुम अपने लिए नहीं जी पाईं,

पर इस दुनिया ने

तुम्हारे होने से

जीना सीखा है।


तुम्हारे जीवन के हर पन्ने पर

आंसू की स्याही है,

पर अक्षर हमेशा

किसी और के सुख लिखते रहे।


तुमने अपने सपनों की चादर

काटकर

दूसरों की रातें ढकीं,

अपनी भूख छुपाकर

किसी और की थाली भरी।


तुम्हारे हाथों ने

अपने लिए कभी महलों के दरवाज़े नहीं खोले,

पर दूसरों के लिए

हर बार स्वर्ग के दरवाज़े खोल दिए।


तुम्हारा दिल,

जिसे कोई पूरी तरह नहीं समझ पाया,

दरअसल वही है

जो इस दुनिया के कई दिलों को

धड़कन देता रहा है।


तुम कहती हो

"सबकी अपनी ज़िंदगी है"

पर मैं जानता हूं—

तुम्हारी ज़िंदगी

कई ज़िंदगियों का सहारा रही है।


तुम सिर्फ जीती नहीं रहीं,

तुमने अपने आप को

प्यार, त्याग और आशीर्वाद

के रूप में जीया है…

और यही तुम्हें

साधारण से असाधारण बनाता है...


मैं तुम्हें

समझने की कोशिश में

अब ये मान चुका हूं—

तुम सिर्फ एक इंसान नहीं,

ईश्वर की दी हुई एक कहानी हो,

जो त्याग में भी खूबसूरत है,

और मौन में भी अमर।

Sunday, 20 July 2025

चलो फिर से…

 (एक मान-मनुहार भरी कविता)


चलो फिर से

वो सिन्दूरी शाम कहीं से ले आएं 

जहाँ तुम मुस्कुराती थी

और मैं चुपचाप तुमको देखता रहता था।


चलो फिर से

वो ख़ामोशी सुन लें

जिसमें लफ़्ज़ नहीं होते थे

पर दिल सब समझ जाते थे।


मैंने कल कुछ कह दिया

शायद ज़रा तेज़, ज़रा कड़वा

पर इरादा…

कभी भी दर्द देने का नहीं था।


ग़लती मेरी थी

पर मोहब्बत तो अब भी वही है

पहली…

सचमुच पहली वाली।


तुम रूठी हो

और मैं टूटा हूँ

तुम चुप हो

और मेरी साँसें थमी हैं।


चलो ना…

थोड़ा सा मुस्कुरा दो

थोड़ा सा ग़ुस्सा कम कर दो

थोड़ा सा मुझे फिर से चाह लो।


मैं वही हूँ

जो तब भी तुम्हारा था

अब भी बस तुम्हारा हूँ

और हर जनम तुम्हारा ही रहूँगा।


तुम शिकवे भी कर लेना

मैं सर झुकाकर सुन लूँगा

पर प्लीज़…

मुझे तुम खुद से दूर मत करना।


अगर मुझसे मोहब्बत है 

तो माफ़ कर दो न 

अगर हमारी मोहब्बत ज़िंदा है

तो एक बार फिर से मुझको थाम लो न 


चलो फिर से

वो पहली सी बात कर लें

जहाँ रूठना भी मोहब्बत था

और मनाना भी मोहब्बत ही होता था।


तुम्हारे बिना

हर पल अधूरा है

हर लम्हा

सिर्फ़ और सिर्फ तुम्हें पुकारता है।


जानता हूँ....मेरी बातों ने

तुम्हें बहुत दर्द दिया है 

पर सच मानो

वो मेरा इरादा कभी नहीं था।


मैं बस…

थोड़ा सा कहीं खो गया था

शायद किसी उलझन में 

उलझ गया था 

पर तुम्हारे प्यार में

अब भी मैं वैसे ही आकंठ डूबा हूँ।


माफ़ कर दो ना जान 

इस दिल को, 

जो बस 

तुम्हारे ही नाम से धड़कता है।


तुम्हारा ग़ुस्सा

सिर आँखों पर

पर मोहब्बत से कहता हूँ—

एक बार फिर हाथ थाम लो न 


चलो फिर से

वो पहली सी मोहब्बत जी लें

जहाँ न कोई दूरी हो

न कोई मलाल।


तुम कहो तो

हर शिकवा लिख दूँ

आसमान पर,

और हर जवाब—

तेरे नाम कर दूँ।


बस एक बार

"हां" कह दो

मैं फिर से

वही दीवाना हो जाऊँ

जो सिर्फ़…

तुम्हारे लिए जीता था।


Monday, 14 July 2025

मेरे महबूब के नाम मोहब्बत भरी वसीयत

 (दिल से निकली वसीयत-ए-इश्क़)


मैं,

तेरे इश्क़ में फ़ना हुआ एक सादा-सा आशिक़,

आज अपनी मोहब्बत की आख़िरी दस्तावेज़

तेरे नाम लिखता हूँ।


मेरे दिल की हर धड़कन,

मेरे जिगर की हर आह,

मेरी रूह की हर तड़प —

सब तेरे हवाले।


जो भी मुझमें था,

अब तुझमें समा गया है।

मैं कुछ भी नहीं,

सिवा तेरे।


तेरे नाम करता हूँ:

वो पहली नज़र का जादू,

जिसने मुझसे मेरी तन्हाई छीन ली।

वो ठहरी सी दोपहरें,

जहाँ तेरा नाम बिन बोले गूंजता रहा।


वो गली,

जहाँ तेरे साथ चुपचाप चला था मैं,

तेरे नाम।


वो चाँदनी रात,

जहाँ तेरे साये में मेरी परछाई थरथराई थी —

तेरे नाम।


वो अधूरी कविताएँ,

जो तुझसे कह नहीं पाया,

हर मिसरा, हर बहर —

तेरे नाम।


तेरे नाम करता हूँ:

वो हर जगह जहाँ हम बिछे,

मिले,

घुले,

और एक-दूसरे में समा गए।


वो स्टेशन की भीड़ में थमा हुआ वो पल,

वो बारिश की ख़ामोशी में भीगा हुआ इकरार,

वो कांपती उंगलियों में बसी गर्मी —

अब सब तेरा हक़।


मेरी आँखों की सारी नींदें,

जो तेरी यादों में जागती रही हैं —

अब वो भी तेरे नाम।


और जब मैं इस दुनिया से रुख़्सत लूं,

मेरी क़ब्र की मिट्टी भी

तेरे कदमों का बिछौना बन जाए।


मैं चाहता हूँ,

जब तू गुज़रे वहाँ से एक शाम,

तेरी ख़ामोश मौजूदगी

मेरी रूह की राहत बन जाए।


तू नहीं तो कुछ भी नहीं।

मैं नहीं, पर तू रहेगी 

और जब तक तू है,

मेरा होना भी रहेगा।


मेरे महबूब,

ये वसीयत एक इश्क़ी दस्तावेज़ नहीं,

ये इक रूह की तहरीर है —

जो तुझमें ही जीती है,

तुझमें ही मरती है।


तेरे नाम, तुझसे ही, तेरे लिए।

– मोहब्बत में लिपटा तेरा दीवाना


मेरे महबूब के नाम मेरी मोहब्बत भरी वसीयत

 (एक काव्यात्मक प्रेम-वसीयत)


मैं,

इस इश्क़ की आख़िरी सांस तक ज़िंदा रहने वाला 

आशिक़,

अपनी सारी मोहब्बत की वसीयत

तेरे नाम करता हूँ —

मेरे महबूब, मेरी रूह की रौशनी,

ये दिल,

ये जिगर,

ये जान —

अब तेरे नाम है।


जो धड़कनें चल रही हैं सीने में,

वो अब तेरे इश्क़ की अमानत हैं।

जो लहू बहता है मेरी रगों में,

उसमें भी अब तेरा नाम घुल चुका है।


मेरे महबूब,

मैं छोड़ता हूँ तेरे लिए —


वो पहला मोड़ जहाँ हम यूँ ही टकराए थे,

वो बरगद की छाँव जहाँ तू मुस्कराई थी,

वो कॉलेज की सीढ़ियाँ जहाँ हम बैठते थे,

हर वो पन्ना जहाँ तेरा नाम लिखा था मैंने चुपके से।


मेरे कमरे की वो खिड़की भी तेरे नाम,

जहाँ से मैं तुझे सोचा करता था,

और हर शाम, हर सुबह,

तू यादों के साथ चली आती थी।


तेरे नाम करता हूँ —

वो सड़क जहाँ तू पहली बार मेरे साथ चली थी,

वो चाय की दुकान,

जिसके कप में दो होंठों की बातों का स्वाद अब भी बचा है।


पार्क की वो बेंच,

जहाँ खामोशी से हमारा इकरार हुआ था,

वो लम्हा जब तेरी उंगलियों ने मेरी हथेली थामी थी —

अब सिर्फ तेरा है।


तेरे नाम करता हूँ —

वो गाने जो हमने साथ सुने,

वो बारिश की बूँदें

जिनमें हम साथ साथ भींगे थे।


मेरे दिल की हर धड़कन,

मेरे जिगर की हर आह,

मेरी रूह की हर तड़प —

सब तेरे हवाले।


जो भी मुझमें था,

अब तुझमें समा गया है।

मैं तो कुछ भी नहीं,

इक सिवा तेरे।


तेरे नाम करता हूँ:

वो पहली नज़र का जादू,

जिसने मुझसे मेरी तन्हाई छीन ली थी।

वो ठहरी सी दोपहरें,

जब तेरा नाम बिन बोले गूंजता था।


वो गली,

जहाँ मैं तेरे साथ चुपचाप चला था,

तेरे नाम।


वो चाँदनी रात,

जब तेरे साये में मेरी परछाई थरथराई थी —

तेरे नाम।


वो अधूरी कविताएँ,

जो मैं तुझसे कह नहीं पाया,

उसका हर हर्फ़, हर लफ्ज़ —

तेरे नाम।


तेरे नाम करता हूँ

हर वो जगह जहाँ हम बिछे,

मिले,

घुले,

और एक-दूसरे में समा गए।


शहर की भीड़ में थमा हुआ वो पल,

बारिश की ख़ामोशी में भीगा हुआ वो इकरार,

कांपती उंगलियों में बसी वो गर्मी —

अब सब तेरे नाम।


मेरी आँखों की सारी नींदें,

जो तेरी यादों में जागती रही हैं —

अब वो भी तेरे नाम।


हर वो जगह

जहाँ मैं तुझमें खोया था,

हर वो वक्त

जिसमें बस तू ही तू बसी थी —

उन पर अब बस तेरा हक़ है।


मैं रहूँ या न रहूँ,

पर ये मोहब्बत ज़िंदा रहेगी।

तेरे होंठों पर मुस्कराहट बनकर,

तेरे लबों की दुआ बनकर।


और आख़िर में —

जो मेरी मज़ार हो एक दिन,

वो भी तेरे नाम करता हूँ —

ताकि तू जब भी आकर वहाँ बैठे,

तेरे कदमों तले मेरी रूह सुकून पाए।


मेरे महबूब,

ये वसीयत सिर्फ लफ्ज़ नहीं,

ये उस रूह की गवाही है

जो बस तेरे नाम से ही जीती रही,

और तेरे नाम पर ही मर जाएगी।


– तेरा वसीयतगार-ए-इश्क़

एक दीवाना जो बस तुझमें ही जिया


Friday, 4 July 2025

The Cosmic Song of Eternal Love


When there was nothing—
no word,
no shape,
no direction—
even then,
there was a heartbeat.
Yours,
and mine.

That heartbeat
was the first echo of creation.
It didn’t contain love—
it was love.

We never asked for promises.
We never needed bodies.
All we longed for
was a silence
deep enough
to hear the language
of each other’s light.

In every lifetime,
we kept meeting—
sometimes hand in hand,
sometimes in silent glances.
Sometimes we folded into a single touch,
and other times
burned quietly
within each other
for centuries.

And when
the edges of the body dissolved—
we were freed.
And love,
for the very first time,
recognized itself.

We are no longer names.
No longer a tale.
We are now
the unspoken voice
that echoes
behind every love story.

When someone surrenders to love—
we are in their breath.

When someone remembers in silence—
we pulse in their heartbeat.

When two souls part,
unable to break their gaze—
we descend
in the glimmer of their tears.

We are no longer
the sound of the temple bell—
we are that vibration
which reaches the Divine
even before the bell rings.

You are within my light—
I dwell in your silence.

You are in my stillness—
I am in your endlessness.

We are no longer
a “we” at all—
we have merged with Brahm
the infinite presence,
where every soul’s journey
begins,
and to which
every journey returns.

“Now, no one searches for love—
Love itself
has become Brahm,
seeking all of us.”



मुक्ति का वह क्षण

 (जहाँ प्रेम ही अंतिम उत्तर था)

उस क्षण —
ना कोई जन्म रहा,
ना मृत्यु का भय।
ना कोई लौटना,
ना कोई छूटना…

सिर्फ़ हम थे—
एक श्वास,
एक रौशनी,
एक अस्तित्व।

न कर्म बाँध सके,
न काल छू सका।
प्रेम ने
हमारे चारों ओर
एक ऐसा वलय रचा,
जहाँ कोई नियम नहीं था—
सिर्फ़ स्पंदन था,
जो एक-दूजे में समाया था।

ना पुकार थी,
ना प्रतीक्षा—
बस वो मौन था,
जिसमें पूरी सृष्टि
सहलाती सी समा गई थी।

तुमने मेरी ओर देखा,
जैसे पहली बार देखा हो—
फिर भी हर युग का स्मरण
तुम्हारी आँखों में था।

मैंने तुम्हारे स्पर्श को
महसूस नहीं किया,
क्योंकि अब
हमारे बीच
कोई ‘स्पर्श’ था ही नहीं।
हम स्वयं ही
एक-दूसरे का विस्तार बन गए थे।

उस क्षण,
जब देह ने अंतिम साँस ली—
रूह मुस्कुराई,
जैसे कह रही हो—
"अब कुछ भी छूट नहीं रहा,
अब सब कुछ मिल चुका है।"

ना पुनर्जन्म की परिक्रमा,
ना इच्छाओं की सूचियाँ—
प्रेम ने
हमारे सारे पथ खोल दिए थे।

हम
एक-दूसरे में
स्वयं को पाकर
मुक्त हो गए।

तुम मेरी रचना बने,
मैं तुम्हारा संगीत।
तुम मेरे मौन में
जैसे ब्रह्म की अंतिम ध्वनि—
मैं तुम्हारे प्रकाश में
जैसे अनंत की अंतिम चित्कार।

अब कोई नाम नहीं,
कोई पहचान नहीं,
सिर्फ़
वो आभा है
जिसमें दो रूहें
एक होकर
अस्तित्व से आगे
बह निकली हैं—

स्वयं प्रेम बनकर।


स्वप्न का अंतिम आलिंगन

(जब हम फिर एक हुए)

रात की सबसे अन्तिम पहर में,
जब नींद
एक सूती आँचल बन
सारे संसार को चादर ओढ़ा रही थी—
मैंने तुम्हें
फिर से देखा।

ना देह थी,
ना दिशा—
बस एक उजाला था,
जो तुम्हारी रूह से फूट रहा था,
और मेरी ओर
धीरे-धीरे बह रहा था।

हम कुछ नहीं बोले।
क्या कहते?
जब मौन ही
सदियों की बातचीत बन जाए,
तब शब्द
कितने छोटे लगने लगते हैं…

तुमने मुझे देखा
जैसे कोई नदी
अपने उद्गम को देखती है—
आश्चर्य, अपनापन, और मौन श्रद्धा में डूबी हुई।

मैंने हाथ नहीं बढ़ाया,
फिर भी
हम पास आ गए।
कोई दूरी
थी ही नहीं अब हमारे बीच।

मैनें तुम्हें 
अपने आलिंगन में नहीं लिया,
बल्कि
तुम मुझमें समा गई —
जैसे शाम का सिन्दूरी रंग
धूप से अलग नहीं होता।

मैंने वो रूहानी स्पंदन सुना,
जो सृष्टि की पहली धड़कन थी।
हम दो नहीं रहे थे —
एक हो चुके थे,
जैसे दो स्वरों से बना एक ही राग।

तारे
थामे खड़े थे अपनी चमक,
चाँद ने साँस रोक ली थी—
पूरी कायनात बस देख रही थी,
जैसे उसे भी
हमारे इस मिलन का इंतज़ार था।

हम वहाँ रहे
समय के बाहर,
एक दूसरे की बाँहों में नहीं,
बल्कि
एक-दूसरे की रौशनी में।

जब तुम जागी,
तो तुम्हारी आँखों में आँसू नहीं थे—
बस एक गहराई थी,
जो कह रही थी—

अब हम कभी जुदा नहीं होंगे,
क्योंकि जो प्रेम
रूह से एक हो गया हो,
उसको कायनात भी 
कभी अलग नहीं करती। 


एक ख़त... उस रूह के नाम

 (जो अब भी हर साँस में बह रही है)

मेरे प्रिय,

अब न कोई तारीख़ है इस पत्र पर,
न कोई पता जहाँ इसे भेजा जाए।
फिर भी जानती हूँ—
तुम तक पहुँचेगा,
जैसे हर भावना
बिना रास्ते के भी
अपने घर पहुँच जाती है।

कभी-कभी सोचती हूँ,
हमारा मिलना
वक़्त की भूल नहीं था—
बल्कि वक़्त से परे
कोई पुराना वादा था,
जो निभा लिया हमने
बिना शर्तों के, बिना उम्मीदों के।

तुम्हारा जाना…
क्या वाक़ई जाना था?
या बस
एक रूप से दूसरे में ढल जाना?
क्योंकि मैं तुम्हें
अब भी हर सुबह की हवा में पाती हूँ—
उस चुप्पी में
जो सबसे सच्ची भाषा है।

तुम अब देह नहीं—
लेकिन जब भी कोई ख़ुशबू
अचानक दिल को छू जाती है,
मैं मुस्कुरा देती हूँ—
"ये तुम ही तो हो…"

मैंने भी अपने भीतर की ठोस दीवारें
धीरे-धीरे भुला दी हैं।
अब मैं कोई नाम नहीं,
कोई कहानी नहीं—
बस एक एहसास हूँ,
जो तुम्हारे मौन में गूंजता है।

हम मिलते हैं
हर उस ख़्वाब में
जहाँ रोशनी
रंग नहीं मांगती,
और छुअन
शब्दों की मोहताज नहीं होती।

तुम मेरे अंतिम विचार में नहीं—
तुम तो अब
हर विचार की शुरुआत हो।

जिस प्रेम को हमने जिया,
उसने वक़्त को भी झुकना सिखा दिया।
अब हमें
किसी ‘फिर से मिलने’ की ज़रूरत नहीं—
क्योंकि हम
कभी बिछड़े ही नहीं।

तुम,
मेरी हर साँस की धुन में।
मैं,
तुम्हारे हर मौन के अंतराल में।

बस यूँ ही बहते रहेंगे—
एक-दूसरे में,
एक रौशनी की तरह
जो कभी बुझती नहीं।

तुम्हारी —
हमेशा की तरह।